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NDA Seat Sharing 2025: NDA में सीट बंटवारा तय, Chirag Paswan और Dharmendra Pradhan की बड़ी भूमिका समझें

NDA Seat Sharing 2025
📅 13 Oct 2025 | ⏰ 5 मिनट | 📰 bihar news

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है, वैसे-वैसे राजनीति का पारा भी चढ़ता जा रहा है। NDA (National Democratic Alliance) में सीट बंटवारे को लेकर कई दिनों से चल रही जद्दोजहद आखिरकार खत्म हो गई है। लंबी बैठकों, नाराजगी और कई दौर की चर्चाओं के बाद आखिर NDA में सभी दलों के बीच समझौता हो गया।
इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम में Chirag Paswan और Dharmendra Pradhan की भूमिका सबसे अहम रही।

NDA Seat Sharing 2025: कई बैठकों के बाद हुआ फाइनल फैसला

बीजेपी, जेडीयू, हम और एलजेपी (रामविलास) के बीच सीट बंटवारे पर चर्चा लंबे समय से जारी थी। बीजेपी के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, शुरू में सीटों की संख्या को लेकर काफी असहमति थी। Chirag Paswan करीब 40 सीटों की मांग पर अड़े हुए थे, जबकि बीजेपी और जेडीयू इसके पक्ष में नहीं थे।

Chirag Paswan की नाराजगी और सियासी सस्पेंस

जैसे ही चुनाव आयोग ने तारीखों का ऐलान किया, NDA के भीतर से मतभेद की खबरें आने लगीं। मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया कि चिराग पासवान NDA से अलग होने पर विचार कर रहे हैं। उनकी नाराजगी का मुख्य कारण सीटों की संख्या थी।
चिराग का कहना था कि उनकी पार्टी एलजेपी (रामविलास) ने पिछले चुनाव में अच्छा प्रदर्शन किया था, इसलिए उन्हें कम सीटें मिलना अन्याय होगा।

Dharmendra Pradhan की एंट्री — सियासी सुलह की कोशिश

बीजेपी के वरिष्ठ नेता और बिहार प्रभारी Dharmendra Pradhan को इस संकट को संभालने की जिम्मेदारी दी गई।
उन्होंने लगातार एनडीए के सहयोगी दलों से मुलाकात की। लेकिन चिराग पासवान दूरी बनाए हुए थे। जब हालात और बिगड़ने लगे, तो धर्मेंद्र प्रधान और विनोद तावड़े खुद चिराग के आवास पर पहुंचे।

पहली मुलाकात रही बेअसर

पहली मुलाकात में कोई बड़ी सफलता नहीं मिली। सूत्रों के अनुसार, चिराग ने अपनी 40 सीटों की मांग दोहराई।
बीजेपी की ओर से उन्हें 25 सीटों का ऑफर दिया गया, लेकिन चिराग इससे संतुष्ट नहीं हुए। तनाव इतना बढ़ गया कि उन्होंने अपने करीबी सांसद अरुण भारती को बातचीत का जिम्मा सौंप दिया।

NDA से अलग होने की अटकलें तेज

मीडिया में खबरें आने लगीं कि चिराग पासवान NDA से अलग हो सकते हैं। सोशल मीडिया पर #ChiragPaswan ट्रेंड करने लगा। लोगों ने यह तक कहना शुरू कर दिया कि वे महागठबंधन (RJD-कांग्रेस) से जुड़ सकते हैं। लेकिन बीजेपी ने स्थिति संभालने के लिए एक बार फिर धर्मेंद्र प्रधान को आगे किया।

Dharmendra Pradhan ने फिर किया प्रयास

इस बार धर्मेंद्र प्रधान ने रणनीति बदली। उन्होंने नित्यानंद राय को भी साथ लिया और चिराग से लंबी बैठक की।
कई घंटे चली इस मीटिंग के बाद आखिरकार चिराग पासवान नरम पड़े। उन्हें 29 सीटों पर सहमति बन गई।

बैठक के बाद सकारात्मक संकेत

बैठक खत्म होने के बाद जब धर्मेंद्र प्रधान और चिराग पासवान मीडिया के सामने आए, तो दोनों के चेहरे पर मुस्कान थी।
उन्होंने कोई बयान नहीं दिया, लेकिन उनके हावभाव से साफ था कि मामला सुलझ गया है। अगले दिन NDA ने सीट बंटवारे का आधिकारिक ऐलान कर दिया।

Final NDA Seat Sharing 2025 Formula

सूत्रों के अनुसार बिहार NDA में सीटों का फॉर्मूला कुछ इस प्रकार तय हुआ —

  • BJP: 115 सीटें
  • JDU: 98 सीटें
  • LJP (Ram Vilas): 29 सीटें
  • HAM: 8 सीटें
  • RLM और अन्य छोटे दल: शेष सीटें

इस फॉर्मूले पर सभी पार्टियों ने अपनी सहमति दी है।

Dharmendra Pradhan का सियासी मैनेजमेंट

धर्मेंद्र प्रधान का यह मैनेजमेंट फिर साबित करता है कि वे बीजेपी के सबसे भरोसेमंद नेताओं में से एक हैं।
वे इससे पहले भी उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बंगाल, हरियाणा और ओडिशा के चुनावों में संगठनात्मक रूप से बड़ी भूमिका निभा चुके हैं। उनका शांत स्वभाव और संयमित रवैया उन्हें संकट मोचक बना देता है।

Bihar Politics में Dharmendra Pradhan की पकड़

धर्मेंद्र प्रधान को बिहार की सियासत की नब्ज़ समझ में आती है। उन्होंने न सिर्फ बीजेपी बल्कि जेडीयू और एलजेपी के नेताओं के साथ बेहतर तालमेल बनाया है। उनके सौम्य स्वभाव की वजह से कई बार विरोधी भी उन्हें ‘समझदार नेता’ कहते हैं।

Chirag Paswan का इमेज मेकओवर

इस पूरे घटनाक्रम के बाद चिराग पासवान ने खुद को एक सशक्त युवा नेता के रूप में स्थापित किया है। उन्होंने साबित किया कि वे अपनी पार्टी के हितों के लिए अडिग हैं, लेकिन NDA के साथ गठबंधन को भी महत्व देते हैं। यह उनकी राजनीतिक परिपक्वता का संकेत है।

Bihar Election 2025: NDA अब एकजुट

अब जब सीट बंटवारा तय हो चुका है, NDA का पूरा फोकस कैंपेनिंग और जनसंपर्क पर है। बीजेपी और जेडीयू संयुक्त रैलियों की तैयारी कर रही हैं, जबकि एलजेपी (रामविलास) अपने प्रभाव वाले क्षेत्रों में प्रचार तेज कर रही है।

निष्कर्ष: एकजुट NDA, मजबूत संदेश

बिहार चुनाव 2025 के लिए NDA Seat Sharing का अध्याय अब बंद हो गया है। धर्मेंद्र प्रधान की भूमिका और चिराग पासवान की सहमति ने इस गठबंधन को मजबूती दी है। राजनीति में मतभेद तो रहते ही हैं, लेकिन जब संवाद और धैर्य से काम लिया जाए, तो समाधान भी निकल ही आता है।

FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

Q1. बिहार NDA में सीट बंटवारा कब तय हुआ?
A1. अक्टूबर 2025 के पहले हफ्ते में सभी दलों की सहमति से सीट बंटवारा फाइनल हुआ।

Q2. चिराग पासवान को कितनी सीटें मिलीं?
A2. उन्हें 29 सीटों पर लड़ने की सहमति मिली है।

Q3. धर्मेंद्र प्रधान की क्या भूमिका रही?
A3. उन्होंने सभी NDA सहयोगियों के बीच संवाद बनाकर संकट को सुलझाया।

Q4. क्या चिराग पासवान NDA छोड़ने वाले थे?
A4. हां, शुरू में ऐसी अटकलें थीं, लेकिन बाद में उन्होंने गठबंधन में बने रहने का फैसला किया।

Q5. NDA के सीट बंटवारे में कौन से प्रमुख दल शामिल हैं?
A5. बीजेपी, जेडीयू, एलजेपी (रामविलास), हम और अन्य छोटे दल।

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✍ लेखक के बारे में

Puja Verma

Puja Verma is a seasoned content writer and copy editor with over 6 years of experience in the Media Industries. She has worked with several leading news channels and media agencies like Doordarshan and News18. Crafting compelling stories, SEO blogs, and engaging web content. Passionate about delivering value through words, she brings clarity, creativity, and accuracy to every project she handles.