SC ST Reservation Creamy Layer Update: भारत में आरक्षण (Reservation) हमेशा से एक संवेदनशील और चर्चा का विषय रहा है। हमारे संविधान निर्माताओं ने पिछड़ी जातियों को समाज की मुख्यधारा में लाने के लिए आरक्षण का प्रावधान किया था। लेकिन, दशकों बाद आज यह सवाल उठ रहा है कि क्या इसका लाभ वास्तव में समाज की अंतिम कड़ी तक पहुँच पा रहा है?
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) श्रेणियों के भीतर ‘क्रीमी लेयर’ (Creamy Layer) सिद्धांत को लागू करने की मांग वाली जनहित याचिका (PIL) पर केंद्र और सभी राज्य सरकारों को नोटिस जारी किया है।
SC ST Reservation Creamy Layer Update: CJI सूर्यकांत की पीठ का बड़ा फैसला
सोमवार को इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जोयमाल्य बागची की पीठ ने अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय द्वारा दायर याचिका को गंभीरता से लिया। अदालत ने माना कि आरक्षण के लाभों का न्यायपूर्ण वितरण सुनिश्चित करने के लिए सभी राज्यों की राय और केंद्र का रुख जानना अनिवार्य है।
अदालत ने यह नोटिस 2026 के इस नए कानूनी मोड़ पर जारी किया है, जो आने वाले समय में आरक्षण की पूरी परिभाषा को बदल सकता है।
SC ST Reservation Creamy Layer Update: क्या है याचिका की मुख्य मांग?
अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय ने शीर्ष अदालत के सामने तर्क दिया कि अब समय आ गया है जब एससी/एसटी आरक्षण के लाभों का वितरण अधिक न्यायपूर्ण (Justiceable) तरीके से किया जाए। याचिका की प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं:
- संवैधानिक पदों पर बैठे परिवार: यदि किसी SC/ST परिवार का सदस्य पहले से ही किसी संवैधानिक पद या क्लास-1 अधिकारी (जैसे IAS, IPS) जैसे वरिष्ठ पदों पर है, तो उनके बच्चों को आरक्षण के दायरे से बाहर रखा जाना चाहिए।
- समानता का सिद्धांत: संपन्न परिवारों को लगातार लाभ मिलने से उस वर्ग के सबसे पिछड़े और जरूरतमंद लोग पीछे रह जाते हैं।
- क्रीमी लेयर का विस्तार: जिस तरह OBC वर्ग में एक आय सीमा (Income Limit) तय है, वैसी ही व्यवस्था SC/ST वर्ग के लिए भी लागू की जाए।
SC ST Reservation Creamy Layer Update: आरक्षण का मूल उद्देश्य और वर्तमान स्थिति
याचिकाकर्ता का तर्क है कि आरक्षण का उद्देश्य ‘सकारात्मक कार्रवाई’ (Affirmative Action) है, जिसका अर्थ है दबे-कुचले लोगों को ऊपर उठाना। लेकिन वर्तमान स्थिति में, उसी वर्ग के भीतर सामाजिक और आर्थिक रूप से उन्नत हो चुके परिवार ही बार-बार आरक्षण की ‘मलाई’ खा रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट में दी गई दलील के अनुसार, संपन्न लोगों को निरंतर लाभ देना आरक्षण के मूल उद्देश्य को ही विफल कर देता है। यह उन लोगों के साथ अन्याय है जो आज भी गाँवों और पिछड़े इलाकों में बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
SC ST Reservation Creamy Layer Update: सुप्रीम कोर्ट का 2024 का ऐतिहासिक फैसला
आपको बता दें कि यह बहस नई नहीं है। अगस्त 2024 में सुप्रीम कोर्ट की सात जजों की पीठ ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया था, जिसमें राज्यों को SC/ST के भीतर उप-वर्गीकरण (Sub-classification) करने और क्रीमी लेयर की पहचान करने की अनुमति दी गई थी। अब 2026 में CJI सूर्यकांत के सामने आई यह याचिका इसी दिशा में एक निर्णायक कदम मानी जा रही है।
SC ST Reservation Creamy Layer Update: केंद्र और राज्यों की भूमिका
अब गेंद केंद्र और राज्य सरकारों के पाले में है। सुप्रीम कोर्ट यह समझना चाहता है कि क्या सरकारी आंकड़े भी इस बात की पुष्टि करते हैं कि आरक्षण का लाभ केवल कुछ विकसित परिवारों तक ही सीमित रह गया है? सरकारों का जवाब यह तय करेगा कि क्या भविष्य में SC/ST आरक्षण के नियमों में कोई बड़ा संसोधन होगा।
आरक्षण में बदलाव की यह मांग समाज में समानता लाने की दिशा में एक साहसिक कदम हो सकती है। हालांकि, यह मुद्दा राजनीतिक रूप से काफी जटिल है। यदि ‘क्रीमी लेयर’ का सिद्धांत लागू होता है, तो यह सुनिश्चित हो पाएगा कि आरक्षण का लाभ वाकई उस गरीब और पिछड़े व्यक्ति तक पहुँचे जिसे इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है।
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