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Samrat Chaudhary and Vijay Sinha Deputy CM: EBC और राजपूत विधायकों की बड़ी संख्या के बावजूद कुशवाहा-भूमिहार पर दांव क्यों? अमित शाह ने क्यों नहीं बदला ‘विनिंग कॉम्बिनेशन’?

Samrat Chaudhary and Vijay Sinha Deputy CM

Samrat Chaudhary and Vijay Sinha Deputy CM: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में NDA की प्रचंड जीत के बाद, नई सरकार के गठन की प्रक्रिया में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। पार्टी विधायक दल की बैठक में सम्राट चौधरी को विधायक दल का नेता और विजय कुमार सिन्हा को उपनेता चुना गया है। इस निर्णय के साथ ही, इन दोनों नेताओं के दोबारा बिहार सरकार में उपमुख्यमंत्री (Deputy CM) बनने का रास्ता साफ हो गया है।

Samrat Chaudhary and Vijay Sinha Deputy CM: फैसला क्यों चौंकाने वाला?

परंपरागत रूप से, बड़ी जीत के बाद पार्टियाँ अक्सर नए चेहरों को मौका देती हैं या जातीय समीकरणों को साधने के लिए संतुलन साधती हैं।

  • ईबीसी फैक्टर: बिहार में अति पिछड़ा वर्ग (EBC) बीजेपी का एक बड़ा वोट बैंक है, जिसने 2025 में NDA को भारी समर्थन दिया। कई मजबूत ईबीसी विधायक जीतकर आए हैं।
  • राजपूतों का बड़ा प्रतिनिधित्व: राजपूत समुदाय से भी विधायकों की संख्या अच्छी-खासी है, और उप-मुख्यमंत्री पद के लिए इस समुदाय के नेता भी सशक्त दावेदार थे।
  • कुशवाहा (सम्राट चौधरी) और भूमिहार (विजय सिन्हा): कुशवाहा और भूमिहार समुदाय का प्रतिनिधित्व संख्या में उतना बड़ा नहीं है, जितना ईबीसी और राजपूतों का। ऐसे में इन्हीं चेहरों को दोहराना एक खास रणनीति की ओर इशारा करता है।

Samrat Chaudhary and Vijay Sinha Deputy CM: किसका चला दिमाग? अमित शाह की रणनीतिक सोच

इस फैसले के पीछे किसी और का नहीं, बल्कि बीजेपी के ‘चाणक्य’ और देश के गृह मंत्री अमित शाह की गहरी और दूरगामी रणनीति काम कर रही है। अमित शाह ने इस निर्णय के माध्यम से एक साथ कई लक्ष्यों को साधा है, जिसका अंतिम उद्देश्य 2029 के लोकसभा चुनाव तक बिहार में पार्टी के आधार को और मज़बूत करना है।

1. निरंतरता और ‘विनिंग कॉम्बिनेशन’ पर भरोसा

  • सफलता की मोहर: सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा ने विपक्ष में रहते हुए RJD पर आक्रामक रुख अपनाया था और फिर NDA की सरकार में डिप्टी सीएम के रूप में सफलतापूर्वक काम किया। उनकी जोड़ी ने NDA को 2025 के चुनाव में जबरदस्त जीत दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  • रणनीति: अमित शाह ने ‘विनिंग कॉम्बिनेशन’ को बदलने का कोई जोखिम नहीं लिया। उनका मानना है कि जब तक परिणाम सकारात्मक हैं, संगठन में निरंतरता (Continuity) बनाए रखना आवश्यक है ताकि संगठन में किसी तरह की अस्थिरता पैदा न हो।

2. सामाजिक समीकरणों का सूक्ष्म संतुलन (Micro Social Engineering)

  • सम्राट चौधरी (कुशवाहा/लव-कुश समीकरण): सम्राट चौधरी को बनाए रखने से बीजेपी ने लव-कुश (कुर्मी-कुशवाहा) समीकरण पर अपनी पकड़ मज़बूत की है, जो बिहार में एक अत्यंत प्रभावी वोट बैंक है। यह कदम नीतीश कुमार (जो कुर्मी समुदाय से आते हैं) के वोट बैंक में स्थायी सेंध लगाने में मदद करता है, भले ही नीतीश NDA में हैं।
  • विजय सिन्हा (भूमिहार): विजय कुमार सिन्हा (भूमिहार) को बनाए रखने से बीजेपी ने अपने पारंपरिक उच्च जाति (Upper Caste) के आधार को सम्मान दिया है। इससे यह सुनिश्चित किया गया है कि राजपूत और ब्राह्मण जैसे अन्य उच्च जाति समुदायों को भी पार्टी में उचित सम्मान मिले।

3. 2029 लोकसभा चुनाव की तैयारी

  • यह फैसला केवल विधानसभा चुनाव तक सीमित नहीं है। अमित शाह की रणनीति हमेशा अगले बड़े चुनाव पर केंद्रित रहती है।
  • टारगेट: इन दोनों नेताओं को बरकरार रखकर, बीजेपी ने उन्हें अगले पाँच साल तक अपने-अपने समुदायों के बीच पार्टी का जनाधार मज़बूत करने का पूरा मौका दिया है। यह दीर्घकालिक रणनीति 2029 के लोकसभा चुनाव में बिहार की सभी 40 सीटों पर बीजेपी और NDA को एकतरफा जीत दिलाने में मदद करेगी।

संक्षेप में, सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा का दोबारा चयन बीजेपी की एक सुनियोजित राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है, जो जीत के बाद संगठन में स्थिरता, जटिल जातीय समीकरणों के सूक्ष्म संतुलन और आगामी लोकसभा चुनावों के लिए एक मज़बूत आधार बनाने पर केंद्रित है।

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