Nitish Cabinet Decision: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में 29 जनवरी 2026 को हुई कैबिनेट बैठक में 31 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इस बैठक का सबसे बड़ा फैसला छात्रों की प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति (Scholarship) को लेकर रहा, जो लगभग 15 साल बाद दोगुनी कर दी गई है।
बिहार विधानसभा के बजट सत्र से पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य के छात्रों और युवाओं के लिए सौगातों की बौछार कर दी है। गुरुवार को हुई कैबिनेट बैठक में कुल 31 प्रस्तावों को हरी झंडी मिली। इसमें सबसे महत्वपूर्ण निर्णय अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), पिछड़ा (BC) और अति पिछड़ा वर्ग (EBC) के छात्रों की प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति की राशि को बढ़ाना है। इस फैसले से राज्य के करीब 33 लाख छात्रों को सीधा वित्तीय लाभ मिलेगा।
छात्रवृत्ति की नई दरें (Financial Year 2025-26)
महंगाई और छात्रों की जरूरतों को देखते हुए सरकार ने 2011 से लागू दरों को संशोधित कर अब दोगुना कर दिया है।
| कक्षा | पुरानी वार्षिक दर | नई वार्षिक दर (2025-26) |
| कक्षा 1 से 4 | ₹600 | ₹1,200 |
| कक्षा 5 से 6 | ₹1,200 | ₹2,400 |
| कक्षा 7 से 10 | ₹1,800 | ₹3,600 |
| छात्रावासी (Class 1-10) | ₹3,000 | ₹6,000 |
नोट: पिछड़ा और अति पिछड़ा वर्ग के छात्रों के लिए पारिवारिक आय की सीमा को भी ₹1.5 लाख से बढ़ाकर ₹3 लाख कर दिया गया है।
Nitish Cabinet Decision: कैबिनेट बैठक के अन्य 5 बड़े फैसले
छात्रवृत्ति के अलावा नीतीश कैबिनेट ने कई अन्य क्षेत्रों के लिए भी खजाना खोला है:
- बिहार सेमीकंडक्टर पॉलिसी: राज्य में निवेश और हाई-टेक रोजगार को बढ़ावा देने के लिए नई सेमीकंडक्टर नीति को मंजूरी दी गई।
- उस्ताद बिस्मिल्लाह खान संगीत कॉलेज: बक्सर के डुमराव में भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खान के नाम पर संगीत कॉलेज की स्थापना के लिए ₹87.81 करोड़ स्वीकृत किए गए।
- रिटायर्ड जवानों की बहाली: पुलिस व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सेना और अर्धसैनिक बलों के 17,000 रिटायर्ड जवानों को संविदा (Contract) पर बहाल करने का निर्णय लिया गया।
- छात्रावास अनुदान में वृद्धि: पिछड़ा वर्ग छात्रावासों में रहने वाले छात्रों को मिलने वाले ₹1,000 के मासिक अनुदान को बढ़ाकर ₹2,000 कर दिया गया है।
- महिला रोजगार योजना (Phase-2): मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत अब महिलाओं को व्यापार बढ़ाने के लिए ₹2 लाख तक की अतिरिक्त फंडिंग दी जाएगी।
सामाजिक और राजनीतिक समीकरण: क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?
नीतीश सरकार का यह कदम केवल एक प्रशासनिक सुधार नहीं है, बल्कि इसके गहरे सामाजिक और राजनीतिक मायने भी हैं। बिहार में “अति पिछड़ा वर्ग” (EBC) और “महादलित” नीतीश कुमार के सबसे बड़े वोट बैंक माने जाते हैं। आगामी चुनावों को देखते हुए, छात्रवृत्ति की राशि को दोगुना करना इन वर्गों के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। पिछले 15 वर्षों में महंगाई दर में हुई भारी वृद्धि के बाद ₹600 या ₹1200 की राशि नगण्य हो गई थी, जिसे अब तर्कसंगत बनाया गया है।
शिक्षा प्रणाली पर दूरगामी प्रभाव
बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में ‘ड्रॉपआउट रेट’ (स्कूल छोड़ देने वाले बच्चों की संख्या) को कम करना हमेशा से एक बड़ी चुनौती रहा है। स्कॉलरशिप में इस भारी बढ़ोतरी से गरीब माता-पिता अपने बच्चों को काम पर भेजने के बजाय स्कूल भेजने के लिए प्रोत्साहित होंगे। छात्रावास अनुदान (Hostel Grant) को ₹1000 से बढ़ाकर ₹2000 करना भी एक क्रांतिकारी कदम है, क्योंकि इससे दूर-दराज के इलाकों से आकर शहरों में पढ़ने वाले छात्रों के भोजन और रहने का खर्च काफी हद तक कम हो जाएगा।
पिछड़ा वर्ग (OBC) और आय सीमा में ढील
कैबिनेट ने एक और साहसिक फैसला लेते हुए पिछड़ा और अति पिछड़ा वर्ग (BC/EBC) के लिए आय सीमा को 1.5 लाख से बढ़ाकर 3 लाख रुपये कर दिया है। इससे उन मध्यमवर्गीय परिवारों के बच्चों को भी छात्रवृत्ति के दायरे में लाया जा सकेगा, जो पहले तकनीकी कारणों से इससे वंचित रह जाते थे। यह कदम “सबका साथ, सबका विकास” के नारे को धरातल पर उतारने जैसा है।
कैबिनेट के अन्य विभागीय निर्णय
बैठक में स्वास्थ्य विभाग के तहत कई जिलों में नए ट्रॉमा सेंटर और एम्बुलेंस सेवाओं के विस्तार पर भी चर्चा हुई। साथ ही, कृषि विभाग के माध्यम से नई सिंचाई परियोजनाओं के लिए भी फंड आवंटित किया गया है, जिससे किसानों को सीधे लाभ मिलेगा। इन 31 प्रस्तावों के माध्यम से नीतीश सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि उनका फोकस केवल शिक्षा ही नहीं, बल्कि रोजगार, बुनियादी ढांचा और स्वास्थ्य पर भी समान रूप से है।
बजट और क्रियान्वयन
एससी-एसटी छात्रवृत्ति योजना के लिए सरकार ने ₹519.64 करोड़ का वार्षिक बजट आवंटित किया है। सरकार का लक्ष्य शिक्षा में ड्रॉपआउट रेट (Dropout Rate) को कम करना और वंचित वर्गों के बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करना है।
नीतीश सरकार के ये फैसले राज्य के सामाजिक और शैक्षणिक ढांचे को मजबूत करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होंगे। विशेष रूप से स्कॉलरशिप में 100% की वृद्धि गरीब परिवारों के बच्चों के लिए एक बड़ा सहारा बनेगी।
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