Indian Sports Companies Contract Termination: भारत और बांग्लादेश के बीच केवल मैदान पर ही नहीं, बल्कि अब मैदान के बाहर व्यापारिक रिश्तों में भी खटास नजर आ रही है। भारत की दो बड़ी खेल उपकरण दिग्गज कंपनियों, SG (Sanspareils Greenlands) और SS (Sareen Sports) ने कई दिग्गज बांग्लादेशी खिलाड़ियों के साथ अपने करोड़ों के स्पॉन्सरशिप कॉन्ट्रैक्ट को खत्म करने का फैसला किया है। इस कदम से लिटन दास और सौम्य सरकार जैसे बड़े नामों को तगड़ा झटका लगा है।
करोड़ों की डील हुई रद्द: आखिर क्या है पूरा मामला?
भारतीय खेल कंपनियां लंबे समय से बांग्लादेशी क्रिकेटरों को बैट, ग्लव्स, पैड्स और अन्य क्रिकेट किट स्पॉन्सर करती रही हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, SG और SS ने अपने हाथ पीछे खींच लिए हैं। कंपनियों का कहना है कि बांग्लादेश में राजनीतिक अस्थिरता और व्यापारिक अनिश्चितताओं के कारण उन्होंने यह कड़ा फैसला लिया है।
अब इन खिलाड़ियों को आगामी सीरीज और टूर्नामेंट्स में अपने खेल उपकरणों के लिए नए स्पॉन्सर ढूंढने होंगे या फिर खुद के खर्च पर किट खरीदनी होगी।
लिटन दास और सौम्य सरकार पर सबसे बुरा असर
इस Indian Sports Companies Contract Termination का सबसे ज्यादा प्रभाव बांग्लादेश के सीनियर खिलाड़ियों पर पड़ा है। लिटन दास और सौम्य सरकार जैसे खिलाड़ी सालों से इन भारतीय ब्रांड्स का चेहरा रहे हैं।
- बैट और किट की कमी: क्रिकेटरों के लिए उनके बैट की क्वालिटी बहुत मायने रखती है। भारतीय कंपनियों के बल्ले (Bats) अपनी बेहतरीन क्वालिटी के लिए दुनिया भर में मशहूर हैं।
- वित्तीय नुकसान: कॉन्ट्रैक्ट खत्म होने का मतलब है कि इन खिलाड़ियों को मिलने वाली भारी-भरकम स्पॉन्सरशिप राशि अब नहीं मिलेगी।
राजनीतिक तनाव और व्यापारिक रिश्तों में कड़वाहट
विशेषज्ञों का मानना है कि बांग्लादेश में हाल ही में हुए सत्ता परिवर्तन और वहां पैदा हुए भारत विरोधी सेंटीमेंट्स का असर अब क्रिकेट बिजनेस पर भी दिखने लगा है। भारतीय कंपनियां अब वहां निवेश करने या खिलाड़ियों के साथ जुड़ने में जोखिम महसूस कर रही हैं। यह पहली बार है जब इतने बड़े स्तर पर किसी देश के खिलाड़ियों के कॉन्ट्रैक्ट को एक साथ रद्द किया गया है।
बांग्लादेशी क्रिकेट बोर्ड (BCB) की बढ़ी चिंता
खिलाड़ियों के निजी स्पॉन्सरशिप खत्म होने से बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) की भी नींद उड़ गई है। अगर खिलाड़ियों के पास उच्च श्रेणी के उपकरण नहीं होंगे, तो उनके प्रदर्शन पर सीधा असर पड़ सकता है। बीसीबी अब अन्य अंतरराष्ट्रीय ब्रांड्स की तलाश में है, लेकिन भारतीय कंपनियों द्वारा छोड़े गए इस खाली स्थान को भरना उनके लिए आसान नहीं होगा।
क्रिकेट के खेल में उपकरणों की भूमिका बहुत अहम होती है। भारतीय कंपनियों के इस फैसले ने बांग्लादेशी खिलाड़ियों को मुश्किल स्थिति में डाल दिया है। क्या अन्य वैश्विक कंपनियां बांग्लादेशी क्रिकेटरों का साथ देंगी, या फिर इन खिलाड़ियों को घरेलू ब्रांड्स के भरोसे ही मैदान पर उतरना होगा? यह देखना दिलचस्प होगा।
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