India-US Trade Deal 2026: भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में हुए व्यापार समझौते (Trade Deal) को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच सरकार ने अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। विपक्षी दलों और किसान संगठनों की चिंताओं को देखते हुए सरकार के शीर्ष सूत्रों ने भरोसा दिलाया है कि देश के ‘अन्नदाताओं’ के हितों के साथ कोई समझौता नहीं किया गया है। इसके साथ ही ऊर्जा सुरक्षा को लेकर वेनेजुएला से तेल खरीद पर भी नई जानकारी सामने आई है।
किसानों और डेयरी सेक्टर के लिए ‘रेड लाइन’
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारतीय उत्पादों पर टैरिफ घटाकर 18% करने के बाद यह सवाल उठ रहे थे कि क्या भारत ने बदले में अपना कृषि बाजार खोल दिया है? इस पर सरकार का रुख स्पष्ट है:
- संवेदनशील क्षेत्र सुरक्षित: सरकार ने साफ किया है कि कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में जो सुरक्षा कवच पहले था, वह आगे भी बरकरार रहेगा।
- कोई डंपिंग नहीं: अमेरिकी दूध या डेयरी उत्पादों को भारतीय बाजार में डंप करने की अनुमति नहीं दी गई है। भारत ने स्पष्ट किया है कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले डेयरी सेक्टर से कोई छेड़छाड़ नहीं होगी।
- पूरक उत्पाद: सूत्रों के अनुसार, केवल उन्हीं उत्पादों पर विचार किया जा सकता है जो भारतीय किसानों के लिए प्रतिस्पर्धी नहीं हैं (जैसे विशिष्ट मेवे या चेरी)।
ऊर्जा सुरक्षा: वेनेजुएला से तेल की खरीद
रूस से तेल आयात कम करने और अमेरिका के साथ डील के बीच वेनेजुएला का मुद्दा काफी अहम है। सरकार ने अपनी रणनीति साझा की है:
- प्रतिबंधों का पालन: भारत का स्टैंड साफ है—जहां दुनिया में पाबंदी (Sanctions) नहीं है, भारत वहां से अपनी जरूरतों के हिसाब से तेल खरीदेगा।
- वेनेजुएला पर रुख: जब वेनेजुएला पर कड़े प्रतिबंध थे, भारत ने खरीद बंद रखी थी। अब परिस्थितियों में बदलाव और छूट मिलने के बाद, भारत वहां से कच्चा तेल रेट और क्वालिटी के आधार पर खरीदेगा।
- रूस से शिफ्ट: यह कदम रूस से तेल खरीद पर कम निर्भरता और अमेरिकी दबाव के बीच एक संतुलन बनाने की कोशिश माना जा रहा है।
India-US Trade Deal 2026: ट्रेड डील की मुख्य बातें (Summary Table)
| क्षेत्र | सरकार का फैसला |
| टैरिफ (Tariff) | भारतीय उत्पादों पर अमेरिकी टैरिफ 25% से घटकर 18% हुआ। |
| डेयरी और खेती | पूरी तरह सुरक्षित; अमेरिकी उत्पादों के लिए बाजार नहीं खोला गया। |
| कच्चा तेल | रूस के बजाय अब वेनेजुएला और अमेरिका से आयात बढ़ाने पर जोर। |
| IT & Textiles | भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में बड़ी बढ़त मिलेगी। |
भारत-अमेरिका ट्रेड डील 2026 केवल एक व्यापारिक समझौता नहीं, बल्कि एक सोची-समझी कूटनीतिक जीत है। सरकार ने एक तरफ ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा देने के लिए अमेरिकी टैरिफ कम कराए हैं, तो दूसरी तरफ अपने किसानों और डेयरी उद्योग को विदेशी प्रतिस्पर्धा से बचाकर रखा है। वेनेजुएला से तेल खरीद का फैसला भी भारत की ‘स्वतंत्र विदेश नीति’ का हिस्सा है, जो देश की आर्थिक जरूरतों को प्राथमिकता देता है।
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