India Pakistan Handshake Controversy: एशिया कप 2025 के एक ग्रुप ए मुकाबले में भारत ने पाकिस्तान को 7 विकेट से मज़बूती से हराया। लेकिन मैदान पर प्रदर्शन से ज़्यादा चर्चा उस बात की हुई जब भारत के खिलाड़ी मुकाबले के बाद पारंपरिक हैंडशेक करने से इंकार कर गए। इस “India Pakistan no handshake Asia Cup 2025 controversy” ने क्रिकेट जगत में खेल भावना, सम्मान और राजनीति की सीमाओं को लेकर तीव्र बहस छेड़ दी।
मुकाबला और हैंडशेक नक़्सा
- भारत ने 127/9 के स्कोर का पीछा करते हुए सिर्फ़ 15.5 ओवर में लक्ष्य पूरा कर लिया।
- अभी भी मैच की ख़त्म होने के बाद खिलाड़ियों के बीच पारंपरिक हरकत नहीं हुई — कोई हैंडशेक नहीं हुआ। भारत के खिलाड़ी सीधे ड्रेसिंग रूम लौट गए।
- पाकिस्तान की टीम और कोच ने इस व्यवहार को खेल की संवेदनशीलता और सम्मान की कमी माना।
शोएब अख्तर की प्रतिक्रिया
- पूर्व तेज़ गेंदबाज़ शोएब अख्तर ने इस फैसले पर गहरा दुःख व्यक्त किया।
- अख्तर ने कहा, “Cricket match hain, isko political mat banao” — यानी क्रिकेट को राजनीति का हिस्सा मत बनाओ।
- उन्होंने सलमान अली आघा के निर्णय का समर्थन किया कि उन्होंने पोस्ट-मैच समारोह में हिस्सा नहीं लिया। अख्तर का मानना है कि खिलाड़ियों को खेल भावना बनाए रखनी चाहिए।
India Pakistan Handshake Controversy: अन्य प्रतिक्रियाएँ और विवाद
- पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) ने हमले की नहीं बल्कि इस व्यवहार की निंदा की है, इसे “अनुशासनहीन” और खेल भावना के खिलाफ कहा गया है।
- कुछ लोगों ने यह कहा है कि भारतीय खिलाड़ी निर्देशों के अंतर्गत कार्य कर रहे हैं, जो सरकार या बोर्ड द्वारा लिए गए फैसले हो सकते हैं।
- संयुक्त रूप से, इस घटना ने दर्शकों में विभाजन बढ़ा दिया है — कुछ लोग भारत के इस कदम को समझने की कोशिश कर रहे हैं, तो कुछ इसको नफ़रत भरे इशारों वाला मान रहे हैं।
खेल नीति और नैतिकता की बहस
- क्रिकेट के नियमों में “Spirit of Cricket” लिखा है कि हार या जीत के बाद विरोधी टीम को बधाई देना चाहिए। इस प्रथा का उल्लंघन किया गया है, और हो सकता है कि इससे संबंधित नियमों के तहत कोई जांच या कार्रवाई हो।
- साथ ही यह सवाल उठाया जा रहा है कि खेल और राजनीति कहाँ अलग हो और कब मिल जाएँ — क्या खिलाड़ियों को खेल के बाहर की घटनाओं पर ज़्यादा दबाव स्वीकार करना चाहिए?
- खिलाड़ियों की भावनाएँ, सामाजिक मीडिया की प्रतिक्रियाएँ, और दर्शकों की उम्मीदें अब सिर्फ प्रदर्शन तक नहीं सीमित हैं, बल्कि उनकी नैतिकता और व्यवहार तक भी पहुंच गई हैं।
निष्कर्ष
इस “no handshake” विवाद ने यह दिखाया है कि क्रिकेट सिर्फ मुकाबला नहीं है — यह भावनाएँ, प्रतीक, और देशभक्ति का एक प्लेटफ़ॉर्म भी है। शोएब अख्तर जैसे खिलाड़ी हमें याद दिलाते हैं कि खिलाड़ियों और फ़ैंस दोनों को यह याद रखना चाहिए कि खेल का मूल आनंद और सम्मान होना चाहिए। भारत और पाकिस्तान जैसे देशों के बीच जब राजनीतिक तनाव ज़्यादा हो, तो ऐसे मौके विशेष हो जाते हैं जहाँ सम्मान और खेल की भावना की जांच होती है।
FAQs
Q1. भारत-पाकिस्तान मैच में हैंडशेक से क्यों इनकार किया गया?
A: भारत टीम ने इसे अपनी भावनाओं और “सरकार तथा बोर्ड की नीति” के अनुरूप माना है; पोस्ट-मैच हैंडशेक करने से पहले, खिलाड़ी सीधे ड्रेसिंग रूम चले गए।
Q2. शोएब अख्तर ने क्या कहा?
A: अख्तर ने कहा कि खेल को राजनीति से दूर रखना चाहिए और हैंडशेक जैसी पारंपरिक परंपराएँ बनाए रखनी चाहिए।
Q3. PCB या अन्य बोर्ड ने क्या कदम उठाया है?
A: पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने मैच रेफ़री और आयोजकों के इस फैसले पर फॉर्मल प्रोटेस्ट दर्ज किया है, और इस घटना को खेल की आत्मा के विरोध में बताया है।
Q4. क्या इस व्यवहार का कोई नियमों के तहत दंडात्मक असर होगा?
A: ICC के “Spirit of Cricket” और खेल नियमों में ऐसे व्यवहार की शर्तें हैं, लेकिन अभी तक कोई आधिकारिक दंड या जुर्माना की घोषणा नहीं हुई है।
Q5. दर्शकों और प्रशंसकों की राय कैसी है?
A: विभाजित है — कुछ लोग भारत की भावनात्मक स्थिति समझते हैं, तो कुछ लोग इसको खेल के सौंदर्य और पारंपरिक सम्मान की कमी मान रहे हैं। सोशल मीडिया पर बहस चल रही है।
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