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Prashant Kishor और प्रियंका गांधी की मुलाकात, महज़ संयोग या बड़ा राजनीतिक प्रयोग?

Prashant Kishor

Prashant Kishor: बिहार की राजनीति में इन दिनों एक नाम सबसे ज़्यादा चर्चा में है और वह है Prashant Kishor। विधानसभा चुनावों में ‘जन सुराज’ के निराशाजनक प्रदर्शन और लगभग सभी उम्मीदवारों की ज़मानत जब्त होने के बाद माना जा रहा था कि PK अब बैकफुट पर होंगे। लेकिन, हाल ही में प्रियंका गांधी के साथ उनकी मुलाकात ने दिल्ली से लेकर पटना तक की सियासी गलियारों में आग लगा दी है।

क्या Prashant Kishor अब कांग्रेस के ‘संकटमोचक’ बनने जा रहे हैं? या फिर यह बिहार में किसी बड़े महागठबंधन की नई बिसात है? आइए, उन 3 बड़े संकेतों को समझते हैं जो PK की नई चाल की ओर इशारा कर रहे हैं।

1. प्रोफेशनल टीम भंग, अब ‘कोर ग्रुप’ के साथ गुप्त मंथन

जानकारी के अनुसार, Prashant Kishor इन दिनों पटना में ही डेरा डाले हुए हैं। सबसे चौंकाने वाला कदम यह रहा कि उन्होंने अपनी ‘जन सुराज प्रोफेशनल टीम’ को फिलहाल भंग कर दिया है।

  • क्या है रणनीति? चर्चा है कि जनवरी से इसे नए सिरे से शुरू किया जाएगा। फिलहाल, Prashant Kishor अपने सबसे भरोसेमंद ‘खास लोगों’ के साथ बंद कमरों में भविष्य की योजनाएं बना रहे हैं। यह इस बात का संकेत है कि वह अपनी पुरानी गलतियों को सुधारकर एक नए अवतार में वापसी की तैयारी कर रहे हैं।

2. कांग्रेस के साथ बड़ा ‘मैत्री समझौता’?

प्रियंका गांधी और Prashant Kishor की मीटिंग को राजनीतिक विशेषज्ञ किसी बड़े समझौते की शुरुआत मान रहे हैं। इसके दो संभावित पहलू हो सकते हैं:

  • बिहार में ‘हाथ’ का साथ: हो सकता है कि बिहार में अपनी ज़मीन मज़बूत करने के लिए PK कांग्रेस के पुराने संगठनात्मक ढांचे का इस्तेमाल करना चाहते हों।
  • राष्ट्रीय स्तर पर मदद: चर्चा यह भी है कि Prashant Kishor की कंपनी पश्चिम बंगाल समेत अन्य राज्यों के आगामी चुनावों में कांग्रेस की चुनावी रणनीति को धार दे सकती है। हालाँकि, इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन धुआं वहीं उठता है जहाँ आग लगी होती है।

3. हार के बाद भी ’10 साल’ वाली शपथ पर कायम

बिहार चुनाव 2025 में 238 सीटों पर हार और करारी शिकस्त के बाद भी Prashant Kishor के हौसले पस्त नहीं हुए हैं। सोशल मीडिया पर उनका एक इंटरव्यू तेज़ी से वायरल हो रहा है, जिसने विरोधियों की नींद उड़ा दी है।

“मेरा लक्ष्य सिर्फ़ एक चुनाव जीतना नहीं है। मैं अगले 10 साल तक बिहार के लिए काम करता रहूँगा। जब तक बिहार भारत के 10 अग्रणी राज्यों में शामिल नहीं हो जाता, मैं यहीं टिका रहूँगा।” — Prashant Kishor

इस बयान को ‘जन सुराज’ के आधिकारिक प्लेटफॉर्म पर शेयर किया गया है, जो यह साफ़ करता है कि PK फिलहाल बिहार छोड़कर कहीं नहीं जाने वाले। उनका लक्ष्य ‘दीर्घकालिक बदलाव’ है, न कि तात्कालिक सत्ता।

विफलता से सीख या नई राह की तलाश?

इसमें कोई शक नहीं कि पहली चुनावी परीक्षा में Prashant Kishor की पार्टी फेल रही। खुद चुनाव न लड़ना और ब्रांडिंग के भरोसे रहना शायद भारी पड़ा। लेकिन प्रियंका गांधी से उनकी मुलाकात बताती है कि PK अब अपनी ताकत को किसी बड़े राष्ट्रीय दल (कांग्रेस) के साथ जोड़कर एक नया ‘पावर सेंटर’ खड़ा करना चाहते हैं।

निष्कर्ष

Prashant Kishor का अगला कदम क्या होगा? क्या वे कांग्रेस के ‘थिंक टैंक’ बनेंगे या अपनी पार्टी को ही कांग्रेस के साथ मर्ज कर देंगे? फिलहाल सस्पेंस बरकरार है, लेकिन एक बात तय है—प्रशांत किशोर की 10 साल वाली योजना बिहार की सियासत में अभी कई और तूफान लेकर आएगी।

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