Cabinet approves Census: भारत की जनगणना, जिसे दुनिया का सबसे बड़ा प्रशासनिक और सांख्यिकीय अभ्यास माना जाता है, आखिरकार एक नए डिजिटल अवतार में वापसी कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जनगणना 2027 को आयोजित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है, जिसके लिए ₹11,718.24 करोड़ का भारी-भरकम बजट आवंटित किया गया है। यह निर्णय केवल एक आंकड़े एकत्र करने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह देश के इतिहास में एक महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी छलांग है, जो नीति-निर्माण के तरीके को हमेशा के लिए बदल देगी।
पिछली जनगणना 2011 में हुई थी, और COVID-19 महामारी सहित कई कारणों से 2021 की जनगणना निर्धारित समय पर नहीं हो पाई थी। अब, 2027 में होने वाली यह जनगणना, आज़ादी के बाद की आठवीं और पूरी शृंखला में 16वीं जनगणना होगी। इस बार, यह पूरी कवायद कागज-आधारित (Paper-based) प्रणाली से हटकर पूरी तरह से डिजिटल माध्यम पर केंद्रित होगी, जिससे न केवल डेटा की गुणवत्ता सुधरेगी बल्कि इसकी गति और पारदर्शिता भी सुनिश्चित होगी। यह समझना आवश्यक है कि यह जनगणना क्यों ऐतिहासिक है और यह आम नागरिक से लेकर सरकार तक सब पर क्या प्रभाव डालेगी।
Cabinet approves Census: भारत की पहली डिजिटल जनगणना
जनगणना 2027 की सबसे बड़ी विशेषता इसका पूर्ण रूप से डिजिटल होना है। यह परिवर्तन कई नवाचारों (Innovations) के माध्यम से लाया जा रहा है:
- मोबाइल एप्लिकेशन (Mobile App): लगभग 30 लाख फील्ड कर्मचारियों, जिनमें अधिकतर सरकारी शिक्षक होते हैं, को डेटा संग्रह के लिए मोबाइल एप्लिकेशन का उपयोग करने के लिए कहा जाएगा। ये एप्लिकेशन एंड्रॉइड और आईओएस दोनों संस्करणों के लिए उपलब्ध होंगे और इनमें डेटा प्रविष्टि (Data Entry) के दौरान ही त्रुटियों की जाँच (In-built Validation Checks) करने की सुविधा होगी।
- स्वयं-सूचीकरण (Self-Enumeration): नागरिकों को पहली बार अपनी जनगणना जानकारी ऑनलाइन एक समर्पित पोर्टल या मोबाइल ऐप के माध्यम से स्वयं भरने का विकल्प दिया जाएगा। इससे प्रक्रिया में जनता की भागीदारी बढ़ेगी और गणनाकर्मियों का काम आसान होगा।
- सीएमएमएस पोर्टल (CMMS Portal): पूरी जनगणना प्रक्रिया को वास्तविक समय के आधार पर प्रबंधित (Manage) और निगरानी (Monitor) करने के लिए एक समर्पित पोर्टल, जिसे सेंसस मैनेजमेंट एंड मॉनिटरिंग सिस्टम (CMMS) कहा जाता है, विकसित किया गया है। यह सिस्टम यह सुनिश्चित करेगा कि डेटा संग्रह की प्रक्रिया सुचारु रहे और उसमें किसी प्रकार की देरी न हो।
- जियो-टैगिंग (Geo-Tagging): सटीकता सुनिश्चित करने के लिए हर घर और इलाके का जियो-टैगिंग किया जाएगा। इससे यह सुनिश्चित होगा कि कोई भी भौगोलिक क्षेत्र छूट न जाए।
- डेटा सुरक्षा: सरकार ने स्पष्ट किया है कि डिजिटल जनगणना का डिजाइन डेटा सुरक्षा को ध्यान में रखकर किया गया है, जो डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण (DPDP) अधिनियम के अनुरूप सुरक्षा उपायों से लैस है।
Cabinet approves Census: दो चरणों में होगी विशाल कवायद
इस विशाल अभ्यास को सुव्यवस्थित तरीके से पूरा करने के लिए, जनगणना 2027 को दो मुख्य चरणों में आयोजित किया जाएगा:
पहला चरण: गृह सूचीकरण और आवास गणना (Houselisting & Housing Census)
- समय सीमा: अप्रैल से सितंबर 2026 तक।
- उद्देश्य: इस चरण में देश के सभी घरों और इमारतों की सूची तैयार की जाएगी। इसमें घर की स्थिति, उपलब्ध सुविधाएँ (जैसे पीने का पानी, शौचालय, बिजली) और संपत्तियों से संबंधित जानकारी एकत्र की जाएगी। यह चरण जनसंख्या गणना के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करता है।
दूसरा चरण: जनसंख्या गणना (Population Enumeration – PE)
- समय सीमा: फरवरी 2027।
- संदर्भ तिथि: 1 मार्च 2027 की आधी रात।
- उद्देश्य: इस चरण में व्यक्तिगत जानकारी एकत्र की जाएगी, जैसे नाम, आयु, लिंग, धर्म, साक्षरता, शिक्षा का स्तर, आर्थिक गतिविधियाँ, और प्रवासन (Migration) की जानकारी।
- विशेष क्षेत्र: अत्यधिक बर्फबारी वाले क्षेत्रों (जैसे लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के कुछ हिस्से) में जनसंख्या गणना सितंबर 2026 में ही पूरी कर ली जाएगी, ताकि मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों से बचा जा सके।
Cabinet approves Census: ऐतिहासिक समावेशन: जाति और प्रवासन डेटा
जनगणना 2027 केवल डिजिटलीकरण के लिए ही ऐतिहासिक नहीं है, बल्कि इसमें दो महत्वपूर्ण डेटा सेट भी शामिल किए जा रहे हैं जो नीति निर्माण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं:
1. जातिगत गणना (Caste Enumeration):
- आजादी के बाद से, जनगणना में केवल अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) का डेटा ही एकत्र किया जाता था।
- 1931 के बाद यह पहली बार होगा जब अन्य समुदायों की जाति से संबंधित विस्तृत डेटा भी डिजिटल माध्यम से एकत्र किया जाएगा।
- यह डेटा सामाजिक और आर्थिक योजनाओं को लक्षित करने, आरक्षण नीति की समीक्षा करने और देश की विशाल सामाजिक विविधता को बेहतर ढंग से समझने के लिए एक आवश्यक आधार प्रदान करेगा।
2. विस्तृत प्रवासन डेटा (Detailed Migration Data):
- इस बार प्रवासियों (Migrants) से जुड़े सवालों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
- गणना में वर्तमान निवास पर रहने की अवधि, प्रवास के कारण (जैसे रोज़गार, शिक्षा, विवाह) और पिछली निवास स्थान की जानकारी को विस्तार से दर्ज किया जाएगा।
- यह डेटा प्रवासी श्रमिकों और शहरी नियोजन के लिए सटीक जानकारी देगा, जिससे उनके कल्याण और उनके लिए आवश्यक सुविधाओं के प्रावधान में मदद मिलेगी।
Cabinet approves Census: पैमाना, रोज़गार और नीतिगत प्रभाव
जनगणना 2027 का पैमाना अविश्वसनीय है। लगभग 30 लाख फील्ड कर्मचारी (Enumerators and Supervisors) इस विशाल कार्य को पूरा करेंगे, जिससे ग्रामीण और स्थानीय स्तर पर लगभग 1.02 करोड़ मानव-दिवस का अस्थायी रोज़गार भी सृजित होगा।
सबसे बड़ा लाभ डेटा उपयोगिता में आएगा। ‘सेंसस-एज-ए-सर्विस’ (CaaS) नामक नई प्रणाली मंत्रालयों को साफ-सुथरा, मशीन-पठनीय (Machine-readable) और कार्रवाई योग्य (Actionable) डेटा प्रदान करेगी, जिससे नीति निर्माण की गति तेज हो जाएगी।
इस जनगणना का एक दूरगामी राजनीतिक प्रभाव भी होगा, क्योंकि इसके आंकड़े 2029 के आम चुनावों के लिए लोकसभा सीटों के परिसीमन (Delimitation) का आधार बनेंगे। 1976 से सीटों की संख्या स्थिर है, और नया डेटा देश की बदलती जनसांख्यिकी के अनुसार राजनीतिक प्रतिनिधित्व को पुनर्गठित करने में सहायक होगा।
संक्षेप में, ₹11,718 करोड़ के बजट के साथ 2027 की जनगणना, भारत को डेटा-संचालित शासन (Data-Driven Governance) की ओर ले जाने वाला एक बड़ा कदम है, जो पारदर्शिता, गति और सामाजिक समावेश को सुनिश्चित करेगा।
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