Prashant Kishor: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में चुनावी रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) और उनकी पार्टी जन सुराज (Jan Suraaj) को मिली करारी हार के बाद उन्होंने आत्ममंथन और प्रायश्चित का रास्ता चुना है। अपनी पार्टी को लगभग शून्य सीटें मिलने के बाद प्रशांत किशोर ने हार की पूरी ज़िम्मेदारी ली है और इसके लिए जनता से माफी भी मांगी है।
Prashant Kishor: हार की जिम्मेदारी और माफी
चुनाव नतीजों के बाद अपने पहले बयान में प्रशांत किशोर ने स्पष्ट किया कि उन्हें जनता का यह जनादेश स्वीकार है।
- जिम्मेदारी: उन्होंने कहा कि उन्होंने जो लक्ष्य तय किया था, उसे वह पूरा नहीं कर पाए। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि वह जनता का विश्वास नहीं जीत पाए, जिसके लिए वह पूरी तरह से ज़िम्मेदारी लेते हैं।
- जनता से माफी: प्रशांत किशोर ने सार्वजनिक रूप से बिहार की जनता से माफी मांगी है और कहा है कि उनके चुनावी अभियान में कहीं न कहीं कमी रह गई।
Prashant Kishor: मौन धारण के लिए चुना गांधी आश्रम
अपनी असफलता के प्रायश्चित और आगे की रणनीति पर विचार करने के लिए, प्रशांत किशोर ने एक अनोखा तरीका अपनाया है।
- स्थान का चयन: उन्होंने पश्चिम चंपारण (West Champaran) में स्थित भितिहरवा गांधी आश्रम को मौन उपवास के लिए चुना है।
- प्रायश्चित: प्रशांत किशोर इस ऐतिहासिक आश्रम में एक दिन का मौन उपवास रखेंगे। यह मौन उपवास उनकी राजनीतिक असफलता पर आत्ममंथन और भविष्य की रणनीति पर चिंतन का प्रतीक है।
- भितिहरवा का महत्व: इस स्थान का चुनाव महत्वपूर्ण है क्योंकि भितिहरवा गांधी आश्रम महात्मा गांधी के पहले सत्याग्रह (चंपारण सत्याग्रह) का केंद्र रहा था। इस आश्रम में मौन धारण करना उनके इस संकल्प को दर्शाता है कि वह गांधीवादी मूल्यों पर चलते हुए बिहार की व्यवस्था को बदलने की दिशा में अपनी लड़ाई जारी रखेंगे।
इस मौन उपवास के बाद प्रशांत किशोर जन सुराज के भविष्य और बिहार की राजनीति में अपनी अगली रणनीति की घोषणा कर सकते हैं।
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